छात्र आंदोलन 2026: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर छात्रों का प्रदर्शन तेज, देवेंद्र महतो भूख हड़ताल पर

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर छात्र आंदोलन तेज, देवेंद्र महतो भूख हड़ताल पर

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राज्य में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं।

आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र महतो ने अपनी मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए तथा सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

छात्र संगठनों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
  • परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता।
  • योग्य अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा।
  • भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
  • दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।

भूख हड़ताल ने बढ़ाया दबाव

देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन मिलने लगा है। कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने उनके समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए हैं। सोशल मीडिया पर भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भी हुई सुनवाई

इसी बीच देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। संबंधित मामलों की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

सरकार की प्रतिक्रिया

अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया गया है। हालांकि छात्रों की मांगों और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत होने की संभावना भी जताई जा रही है।

निष्कर्ष

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन युवाओं की रोजगार संबंधी चिंताओं को सामने ला रहा है। यदि संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से समाधान निकाला जाता है, तो इससे अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत हो सकता है। वहीं, सभी पक्षों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से समाधान तलाशने की अपेक्षा की जा रही है।