इंडोनेशिया दौरे पर पीएम मोदी: 1170 वर्ष पुराने प्रंबानन शिव मंदिर के संरक्षण में भारत देगा तकनीकी सहयोग


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदमों पर चर्चा कर रहे हैं। इसी क्रम में भारत ने इंडोनेशिया के प्रसिद्ध और लगभग 1170 वर्ष पुराने प्रंबानन शिव मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य में तकनीकी सहायता देने की सहमति जताई है।

प्रंबानन मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में गिना जाता है। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। समय के साथ प्राकृतिक आपदाओं और मौसम के प्रभाव के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर के कई हिस्सों को संरक्षण की आवश्यकता महसूस की गई।

भारत, जिसे प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण का व्यापक अनुभव है, इस परियोजना में अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा। भारतीय विशेषज्ञ संरचनात्मक संरक्षण, पुरातात्विक अध्ययन, पारंपरिक निर्माण तकनीकों और आधुनिक संरक्षण तकनीकों के माध्यम से इंडोनेशिया को तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग केवल एक ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को भी और अधिक मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच विरासत संरक्षण, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है।

प्रंबानन मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है और यह हर वर्ष लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर के संरक्षण में भारत की भागीदारी से इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरोहर और बेहतर स्थिति में संरक्षित रह सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत की ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ को मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।


मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं।
  • भारत प्रंबानन शिव मंदिर के संरक्षण में तकनीकी सहायता देगा।
  • मंदिर लगभग 1170 वर्ष पुराना ऐतिहासिक हिंदू धरोहर स्थल है।
  • भारत अपनी पुरातात्विक और संरक्षण विशेषज्ञता साझा करेगा।
  • इस पहल से भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।