गुड आतंकवाद-बैड आतंकवाद का जाल: कैसे तालिबान की नीति अब पाकिस्तानी सेना पर पड़ रही भारी

पाकिस्तान की ‘गुड आतंकवाद-बैड आतंकवाद’ नीति अब उसी पर पड़ रही भारी

पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरी नीति अपनाने के आरोपों का सामना करता रहा है। एक तरफ उसने कुछ आतंकी संगठनों को अपने रणनीतिक हितों के लिए उपयोगी माना, जबकि दूसरी ओर देश के भीतर सक्रिय समूहों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाए। इसी सोच को अक्सर “गुड आतंकवाद” और “बैड आतंकवाद” की नीति कहा जाता है।

हाल के वर्षों में यही रणनीति पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। विशेष रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। हालिया कराची हमले के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान की पुरानी नीतियां अब उसके लिए खतरा बन चुकी हैं।

क्या है ‘गुड’ और ‘बैड’ आतंकवाद की अवधारणा?

विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान लंबे समय तक उन संगठनों को “गुड” मानता रहा जो उसके बाहरी रणनीतिक हितों के अनुकूल थे, जबकि देश के भीतर हमला करने वाले संगठनों को “बैड” आतंकवादी माना गया। समय के साथ कई समूहों की विचारधारा और गतिविधियां बदलती गईं और कुछ संगठनों ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।

इसी बदलाव ने पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा संकट को और गहरा कर दिया।

TTP क्यों बन रहा है सबसे बड़ी चुनौती?

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ हमले करता रहा है। सुरक्षा बलों, पुलिस चौकियों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले लगातार बढ़े हैं। हाल के कराची हमले ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि TTP को सीमा पार सुरक्षित ठिकाने मिलने के आरोपों ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

कराची हमले के बाद बढ़ा तनाव

कराची में सुरक्षा प्रतिष्ठान पर हुए हमले में सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई, जिसके बाद पाकिस्तान ने सीमा क्षेत्रों में कार्रवाई तेज कर दी। पाकिस्तान का दावा है कि कई आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि अफगान पक्ष ने नागरिक हताहतों की बात कही है।

इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

अफगान तालिबान और पाकिस्तान के रिश्तों में दरार

2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सीमा क्षेत्र में हिंसा कम होगी। हालांकि इसके विपरीत TTP की गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिली।

पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगान सीमा क्षेत्रों में मौजूद आतंकी नेटवर्क उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हैं, जबकि अफगान प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

पाकिस्तान के सामने आगे की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सीमा सुरक्षा, खुफिया तंत्र की मजबूती, क्षेत्रीय सहयोग और आतंकवाद के प्रति स्पष्ट नीति की आवश्यकता बताई जा रही है।

यदि पाकिस्तान अपनी पुरानी नीतियों की समीक्षा नहीं करता है, तो आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां आगे और गंभीर रूप ले सकती हैं।

निष्कर्ष

पाकिस्तान की “गुड आतंकवाद-बैड आतंकवाद” की नीति पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। आज TTP के बढ़ते हमले और अफगान सीमा पर बढ़ते तनाव यह संकेत दे रहे हैं कि आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की दोहरी नीति अंततः उसी देश के लिए खतरा बन सकती है। वर्तमान हालात पाकिस्तान के लिए सुरक्षा, कूटनीति और आंतरिक स्थिरता की बड़ी परीक्षा बन चुके हैं।